Guzarta nahin tha pal bhi jinke bagair
Dekho ye diwali guzar gayi unke bagair
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गुजरता नहीं था पल भी जिनके बगैर
देखो ये दीवाली गुज़र गई उनके बगैर

खुली छतों के दिये कब के बुझ गये होते
कोई तो है जो आंधियों के पर कतरता है
– वसीम बरेलवी
Khuli chhaton ke diye kab ke bujh gaye hote
Koi to hai jo aandhiyon ke par katarta hai
– Waseem Barelvi
अंधियारे को लूटने आए दीप हजारनभ से लेकर भूमि तक, खुशियों का बाज़ार
खुमार बाराबंकवी