Aansoo Shayari आँसू शायरी

आँसू शायरी
आँसू को कभी ओस का क़तरा न समझना
ऐसा तुम्हें चाहत का समुंदर न मिलेगा
आँख की सीप में मोती सा लरजता आँसू
दिल के बेताब समुंद्र का पता देता है
लब पे आहें भी नहीं आँख में आँसू भी नहीं
दिल ने हर राज़ मुहब्बत का छुपा रक्खा है
सीधा सादा डाकिया जादू करे महान
एक ही थैले में भरे आँसू और मुस्कान
कैसे हो पाये भला ‘इनसान’ की ‘पहचान’
दोनो नकली हो गये ‘आँसू’ और ‘मुस्कान

तासीर किसी भी दर्द की मीठी नहीं होती ग़ालिब
वजह यही है कि आँसू भी नमकीन होते हैं
उसने छू कर मुझे पत्थर से फिर इंसान किया
मुद्दतों बाद मेरी आँखों में आँसू आए
आँसू निकल पडे तुझे ख्वाबो मेँ दूर जाते देख कर,
आँख खुली तो एहसास हुआ इश्क सोते हुए भी रुलाता है
मेरे घर से रात की सेज तक वो इक आँसू की लकीर है
ज़रा बढ़ के चाँद से पूछना वो इसी तरफ़ से गया न हो
– Bashir Badr
जंग नहीं समझौता पहले, शायद ये होता था पहले,
सबके आँसू पीकर घर में, एक शख्श रोता था पहले
– Surendra Chaturvedi
ज़िन्दगी की ग़ज़ल के शेरों का?
आख़िरश तर्ज़ुमा तो आँसू है
– Dr. Kumar Vishwas
उन के रुख़्सार पे ढलके हुए आँसू तौबा
मैं ने शबनम को भी शोलों पे मचलते देखा
– Sahir Ludhianvi
आँखों मे आ जाते है आँसू, फिर भी लबो पे हसी रखनी पड़ती है,
ये मोहब्बत भी क्या चीज़ है यारो, जिस से करते है उसीसे छुपानी पड़ती है….
क्या लिखूँ दिल की हकीकत आरज़ू बेहोश है,
ख़त पर हैं आँसू गिरे और कलम खामोश है….
बाद तुम्हारे सब अपनों के मनमाने व्यवहार हुए,
मुस्कानें ही क्या, आँसू भी सालाना त्योहार हुए….
नीँद मेँ भी गिरते है मेरी आँखो से आँसू,
जब भी तुम ख्बाबो मे मेरा हाथ छोड देती हो….
आया नहीं था कभी मेरी आँख से एक आँसू भी,
मोहब्बत क्या हुई आँसुओं का सैलाब आ गया….
हैरान है वो वेइज़ाज़त बस्तियों मे रोशनी देखकर,
धमकियों को क्या पता कि घरों में आँसू जल रहे हैं….
आयेंगे तुझसे मिलने सितारों की रोशनी मे,
ऐ पत्थर-ए-सनम एक आँसू अपनी बेवफ़ाई पर बहा देना….
बह गये सारे आँसू
जो उस बेवफ़ा के नाम थे….
जख्म जब मेरे सीने के भर जाऐंगे
आँसू भी मोती बनकर बिखर जाऐंगे
ये मत पूछना, किस किसने धोखा दिया
वरना कुछ अपनों के चेहरे उतर जाऐंगे….
राम नहीं मिलते ईंटों में गारा में
राम मिलें निर्धन की आँसू-धारा में
राम मिलें हैं वचन निभाती आयु को
राम मिले हैं घायल पड़े जटायु को….

Note:
जिन अशार के आगे शायर या कवि का नाम नहीं लिखा गया है, उनके शायर या कवि अज्ञात ( Unknown ) हैं, नाम ज्ञात होने पर लिख दिया जायेगा!

Arman Shayari अरमान शायरी

दो हिस्सों में बंट गए हैं.. मेरे दिल के तमाम अरमान,
कुछ तुझे पाने निकले.. तो कुछ मुझे समझाने निकले..
do hisso mei bat gaye hain.. mere dil ke tamam arman
kuchh tujhe paane nikle.. to kuchh mujhe samjhane nikle..
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Khwab Shayari / ख़्वाब शायरी

ख्वाब शायरी
Khwab Shayari
Dil mein chhipi yadon se mein sanwarun tujhe
Tu dikhe to apni aankhon mein utaru tujhe
Tere naam ko apne labon par aise sajau
Gar so bhi jaau to khwaabon mein pukaaru tujhe
दिल में छिपी यादों से मैं सवारूँ तुझे,
तू दिखे तो अपनी आँखो में उतारू तुझे,
तेरे नाम को अपने लबों पर ऐसे सजाऊ,
गर सो भी जाऊं तो ख़्वाबों में पुकारू तुझे!